राष्ट्रपिता की पुण्यतिथि आज, शहीद दिवस के रूप में नमन करेगा देश !!

आप उन्हें बापू कहो या महात्मा दुनिया उन्हें इन दोनों नामों से जानती हैं. अहिंसा और सत्याग्रह के संघर्ष से उन्होंने भारत को अंग्रेजो से स्वतंत्रता दिलाई. उनका ये काम पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया. वो हमेशा कहते थे बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो, और उनका ये भी मानना था की सच्चाई कभी नहीं हारती. इस महान इन्सान को भारत ने राष्ट्रपिता घोषित कर दिया. उनका पूरा नाम था ‘मोहनदास करमचंद गांधी. महात्मा गांधी का जन्म गुजरात राज्य के शहर पोरबंदर में हुआ था. गांधीजी ने शुरुआत में काठियावाड़ में शिक्षा ली बाद में लंदन में विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद वह भारत में आकर अपनी वकालत की अभ्यास करने लगे. लेकिन सफल नहीं हुए. उसी समय दक्षिण अफ्रीका से उन्हें एक कंपनी में क़ानूनी सलाहकार के रूप में काम मिला.
वहा महात्मा गांधीजी लगभग 20 साल तक रहे. वहां भारतीयों के मुलभुत अधिकारों के लिए लड़ते हुए कई बार जेल भी गए. अफ्रीका में उस समय बहुत ज्यादा नस्लवाद हो रहा था. उसके बारे में एक किस्सा भी है, जब गांधीजी अग्रेजों के स्पेशल कंपार्टमेंट में चढ़े उन्हें गांधीजी को बहुत बेईजत कर के ढकेल दिया. वहां उन्होंने सरकार विरूद्ध असहयोग आंदोलन संगठित किया.आखिर में अफ्रीकी सर्कार को भी उनके सामने झुकना पड़ा. वे एक अमेरिकन लेखक हेनरी डेविड थोरो लेखों और निबंधो से बेहद प्रभावित थे. आखिर उन्होंने अपने विचारों और अनुभवों से सत्याग्रह का मार्ग चुना, जिस पर गांधीजी पूरी जिंदगी चले. पहले विश्वयुद्ध के बाद भारत में ‘होम रुल’ का अभियान तेज हो गया.1919 में रौलेट एक्ट पास करके ब्रिटिश संसद ने भारतीय उपनिवेश के अधिकारियों को कुछ आपातकालीन अधिकार दिये तो गांधीजी ने लाखों लोगों के साथ सत्याग्रह आंदोलन किया. गांधीजी का पूर्ण विश्वास अहिंसा के मार्ग पर चलने में था, और वो पूरी जिंदगी अहिंसा का संदेश देते रहे. आज ही के दिन 1948 में उन्ही के एक साथी नाथूराम गोडसे ने उनके सीने में तीन गोलियां दाग दी, और अहिंसा के पुजारी ने “हे राम” कहते हुए प्राण त्याग दिए. आज भारत में फ़ैल रही अराजकता से बचने के लिए और देश को फिर से एक सूत्र में बांधने के लिए हमे गांधीजी के अहिंसा के सन्देश को बार बार याद करने की जरुरत है. !!