नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के जीवन के अनसुने किस्से

रामनाथ कोविंद हमारे देश के 14वें राष्ट्रपति होंगे, 25 जुलाई को वे राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे, दिनांक 20 जुलाई 2017 को राष्ट्रपति के निर्वाचन का परिणाम घोषित हुआ जिसमें रामनाथ कोविंद ने यूपीए की प्रत्याशी मीरा कुमार को लगभग 3 लाख 34 हजार वोटों के अंतर से हराया, कोविंद को 65.65 फीसदी वोट हासिल हुए हैं, जबकि मीरा कुमार को 35.34 फीसदी वोट मिले,1 अक्टूबर 1945 को यूपी के कानपुर देहात जिले के परौंख गांव में जन्में कोविंद ने अपने करियर की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के वकील के तौर पर की, मोरार जी देसाई के निजी सचिव बनने के बाद वह भाजपा नेतृत्व के संपर्क में आये. 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद रामनाथ कोविंद तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव बने.वह भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे। वर्ष १९८६ में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्युरो के महामंत्री भी रहे। श्री कोविंद को भारतीय जनता पार्टी ने 1990 में घाटमपुर लोकसभा का टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए. 1993 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश से दो बार राज्यसभा भेजा. .इनके परिवार में पत्नी और एक बेटा-एक बेटी हैं बातचीत में फैमिली मेंबर्स ने बताया कि बेटा प्रशांत और बेटी स्वाति एयरलाइन्स में जॉब करते हैं,आज रामनाथ कोविंद की 3 पीढ़ी की फैमिली ट्री आपके साथ शेयर करने जा रहा है।

 

 

कौन हैं रामनाथ कोविंद यूपी के कानपुर देहात में जन्मे कोविंद (71) 1978 में SC में वकील के तौर पर अप्वाइंट हुए 1980 से 1993 के बीच SC में केंद्र की स्टैंडिंग काउंसिल में भी रहे। 1977 में तब पीएम रहे मोरारजी देसाई के पर्सनल सेक्रेटरी बने बीजेपी का दलित चेहरा हैं। पार्टी ने बिहार इलेक्शन में गवर्नर के तौर पर उनके दलित चेहरे को प्रोजेक्ट किया था। कोविंद दलित बीजेपी मोर्चा के अध्यक्ष रहे। ऑल इंडिया कोली समाज के प्रेसिडेंट हैं।
– कोविंद 1994 से 2000 तक और उसके बाद 2000 से 2006 तक राज्यसभा सदस्य रहे। अगस्त 2015 में बिहार के गवर्नर अप्वाइंट हुए।
– वे 1990 में घाटमपुर से एमपी का इलेक्शन लड़े, लेकिन हार गए। इसके बाद 2007 में कानपुर देहात की भोगनीपुर लोकसभा से चुनाव लादे लेकिन हार गए. रामनाथ कोविंद इसके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी के साथ महामंत्री भी रह चुके है, लेकिन वे लाइमलाइट से इतने दूर रहते हैं कि प्रवक्ता रहने के दौरान कभी भी टीवी पर नहीं आए।

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