कोरोना रूपी महाभारत के रण में, पीएम को परिवार बचाने की चुनौती ..

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में कहर मचा रखा है। अब तक विश्व के 175 से ज्यादा देश इसकी चपेट में आ चुके हैं। भारत में भी कोरोना वायरस से संक्रमण के 580 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने इसे महामारी घोषित कर दिया, पूरे भारत में लॉकडाउन हैं हर किसी से घर के अंदर रहने की अपील की जा रही हैं, मंगलवार को पीएम मोदी ने साफ तौर से कहा कि इस वैश्विक महामारी से निबटने के लिए लिए पुरे देश को एकजुट होने की आवश्यकता है, संयम, विश्वास, संकल्प के साथ लॉकडाउन होने की बात कही, जिससे कि संक्रमण की चेन टूटे और देश में कोरोना महामारी का अंत हो सके आज में आपको एक अहम मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं, और वह हैं व्यवसाय और व्यवसायी, वर्तमान स्थिती में इन्हें कैसे बचाया जा सकता है !

पिछले 10 दिन से और आने वाले 21 दिन पुरे भारत लॉकडाउन की स्थिति रहेगी, उसके बाद हालात के अनुसार फैसला लिया जा सकता है, देश की पुरी अर्थव्यवस्था वर्तमान में ठप हो गई है, लॉकडाउन समाप्ति के बाद भी न जाने कितने दिन और व्यवसाय को फिर से जमने में लग जाएं इसका कुछ सटीक अंदाजा अर्थशास्त्र के पंडितों को भी नहीं है, लॉकडाउन, घरों में सिमटे होने की वजह से यकीनन तौर पर व्यापारी लोग बच जाएं परन्तु बिजली बिल , ऑफिस किराया , बैंक लॉन की किश्तों से वो कैसे मुकाबला करेंगे! उनके अलावा छोटे छोटे व्यापारियों को कर्मचारियों की सेलरी देना कैसे संभव हो पायेगा, इन सवालों पर सीधा प्रश्नवाचक चिन्ह लगता है!
सरकार ने कम्पनी मालिकों से आव्हान किया है कर्मचारियों को वेतन एडवांस और लॉक डाउन के समय ऑफिस न आने की दिशा में भी उन्हें पुरी सेलरी दी जाएं, लेकिन क्या वर्तमान मंदी के दौर में ये संभव हो पाएगा ?

व्यवसायियों की समस्या :

वित्तमंत्री ने मंगलवार को जीएसटी , रिटर्न जैसे चीजों का समय अवश्य बढ़ा दिया हो , परन्तु कुछ अवधि के बाद भी व्यापारी वर्ग को ये रकम देना होगा, साथ ही इसके अलावा लगभग १ महीने देशव्यापी बंद के कारण बिजली बिल, पानी बिल, ऑफिस का किराया , कर्मचारियों का वेतन, फ़ोन का मासिक बिल , सुरक्षा बिल , व्यवसाय पर बैंक द्वारा लिए गए ऋण की मासिक किश्त का भुगतान , ऐसी बहुत सारी समस्याओं पर गौर करना आवश्यक है सरकार को .. देश में कई उधोग क्षेत्र तबाह होने की कगाड़ पर खड़ें हैं ..

होटल व्यवसायी, टूरिज्म क्षेत्र

कोरोना का असर पिछले 15 दिनों से देश में होटल व्यवसाय पर पड़ा है। पूरी तरह से धंधा चौपट हो गया। 10 मार्च से तो होटलों में न के बराबर बुकिंग हो रही है, कमरे खाली जा रहे हैं। करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। पहले पर्यटन स्थलों के होटलों में देसी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहते थे लेकिन वर्तमान में ये व्यवसाय पुरी तरह से चौपट हो गया है |

मोटर उधोग

मोटर उधोग पर मंदी की मार तो पहले से ही पड़ी थी और कोरोना के बाद ये सेक्टर पुरी तरह से दलदल में फंसता नजर आ रहा है, सरकार पहले ही इस सेक्टर को उबाड़ने में लगी थी लेकिन स्थिति सुधरने की वजाय ओर जटील होती जा रही है…

 

कोरोना के चलते छोटे उद्योगों के व्यवसायी परेशान, सरकार राहत पैकेज दे: सोनिया गांधी

भारत में कोरोना वायरस संकट के चलते कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गांधी ने कहा है, “सर्वाधिक रोज़गार देने वाला कृषि क्षेत्र कोरोना से प्रभावित हुआ है और सभी कारोबार खास तौर पर सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग बहुत परेशान हैं।” उन्होंने कहा, “सरकार को टैक्स ब्रेक, कर्ज़ अदायगी पर रोक जैसे बड़े आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।

कोरोना का कहर पुरे विश्व पर दिख रहा है, कई देशों के राष्ट्रअध्यक्षों ने आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है, ताकि देश के अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके…

कनाडा के प्रधानमंत्री ने 18 मार्च को इस चुनौतीपूर्ण अवधि के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद करने के लिए आर्थिक उपायों के एक नए सेट की घोषणा की। कनाडा की सरकार की COVID-19 आर्थिक प्रतिक्रिया योजना के हिस्से के रूप में दिए गए ये उपाय, कनाडाई श्रमिकों को सीधे समर्थन में $ 27 बिलियन तक प्रदान करेंगे..

 

वहीं अमेरिकी सरकार ने भी देश की अर्थवयवस्था को संभालने के लिए 2 लाख करोड़ का पैकेज का ऐलान किया है, कोरोना वायरस महामारी का दायरा इतना बड़ा है कि अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़े आर्थिक पैकेज के तौर पर इसे देखा जा रहा है, इस पैकेज के तहत के अमेरिकी नागरिकों को डायरेक्ट पेमेंट किया जाऐगा, जिसका सीधा फायदा वहां की आवाम को होगा

हमारे देश की एक बड़ी आबादी आज भी रोटी, कपड़ा और मकान के लिए जूझ रही है, और उस वातावरण में यदि देश की अर्थव्यवस्था का चक्का रूक जाएं तो भूखमरी होना लाजमी है, देश का मजदूर वर्ग वर्तमान में अपने भविष्य को लेकर असंमजस में है, दिहाड़ी मजदूर के सामने जीवन यापन करना एक चुनौती बन गया है, आवाजाही के साधे साधने बंद हो चुके हैं, किस्मत का चक्का रूक गया है, और भूखमरी धीरे धीरे जोड़ पकड़ने लगी है, वर्तमान में आवाम की उम्मीद सरकार से है, सिस्टम से है, देश इस महामारी को झेल लेगा, सरकार की कोशिश को और रंग देने की जरूरत है, पीएम देश को एक परिवार मानते हैं और परिवार को इस राक्षस रूपी वायरस से बचाने के लिए और मजबूत इरादे की आवश्कता है, आर्थिक तौर पर देश के सरकार के साथ खड़ा होना होगा, ताकि पीएम के शब्दों में इस महाभारत को जीतने के लिए देशवासी को रणक्षेत्र में उतरने से पहले शांति, सहयोग और सहनशीलता के साथ मजबूत होना होगा, इसके लिए शारिरिक, मानसिक रूप से मजबूत होने की जरूरत है. इस मजबूती को प्रदान करने में आर्थिक पैकेज की सख्त आवश्कता होगी, और देशवासी का यह हक भी है…

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